बहुत समय पहले, अयोध्या नगरी में राजा दशरथ के चार बेटे थे। सबसे बड़े थे दयालु और बहादुर राम।
राम अपने भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ बड़े हुए। वे साथ खेलते, साथ पढ़ते और हमेशा मिल-बाँटकर रहते।
एक दिन राम और लक्ष्मण एक ज्ञानी गुरुजी के साथ मिथिला नगरी गए। वहाँ सीता नाम की एक राजकुमारी रहती थीं।
सीता के पिता राजा जनक के पास शिवजी का एक बहुत बड़ा धनुष था। उन्होंने कहा, “जो इस धनुष को उठा लेगा, उसी से सीता का विवाह होगा।” बहुत से ताक़तवर राजाओं ने कोशिश की। पर कोई उसे हिला भी नहीं पाया।
फिर राम आगे आए। उन्होंने धनुष ऐसे उठा लिया जैसे वह पंख जितना हल्का हो। उन्होंने डोरी खींची, और कड़ाक! वह बड़ा धनुष दो टुकड़ों में टूट गया। सब हैरान रह गए।
सीता मुस्कुराईं और उन्होंने राम को फूलों की माला पहनाई। राम और सीता का विवाह हुआ, और पूरी नगरी ने गीत गाकर और दीये जलाकर खुशियाँ मनाईं।
कहानी की शिक्षासच्ची ताक़त कोमल और दयालु होती है।
आओ बात करें: राम बहुत ताक़तवर थे, पर वे कोमल भी थे। तुम ताक़तवर और कोमल एक साथ कैसे बन सकते हो?



