राम और लक्ष्मण ने सीता को पूरे वन में ढूँढा। उन्होंने पेड़ों से, पक्षियों से और नदियों से पूछा। किसी ने उन्हें नहीं देखा था।
वे एक पथरीली पहाड़ी पर पहुँचे, जहाँ वानरराज सुग्रीव रहते थे। सुग्रीव ने धनुष लिए दो अनजान लोगों को देखा और वे डर गए।
उन्होंने अपने समझदार दोस्त हनुमान को यह पता करने भेजा कि वे कौन हैं। हनुमान एक साधारण यात्री बनकर आए और बड़े आदर से पूछा।
राम ने इतने प्यार से बात की कि हनुमान समझ गए कि वे अच्छे हैं। हनुमान ने झुककर प्रणाम किया और कहा, “प्रभु राम, मैं आपकी मदद करूँगा।”
राम और सुग्रीव दोस्त बन गए। राम ने कहा, “मैं तुम्हारी मदद करूँगा।” सुग्रीव ने कहा, “और मेरे वानर सीता को ढूँढने में आपकी मदद करेंगे।”
वानर सीता को ढूँढने के लिए हर दिशा में निकल पड़े। राम ने हनुमान को अपनी अँगूठी दी। उन्होंने कहा, “यह सीता को दिखाना। वे समझ जाएँगी कि तुम मेरे दोस्त हो।”
कहानी की शिक्षासच्चा दोस्त ज़रूरत के समय मदद करता है।
आओ बात करें: हनुमान इतने अच्छे दोस्त क्यों हैं? तुम्हारा अच्छा दोस्त कौन है?



