चौदह साल बीत गए। राम का वनवास पूरा हो गया था, और अब घर लौटने का समय था।
राम, सीता और लक्ष्मण पुष्पक में बैठे। यह एक उड़ने वाला रथ था, जो एक बड़े कमल के फूल जैसा दिखता था। हनुमान और उनके दोस्त भी साथ आए।
अयोध्या में भरत एक-एक दिन गिन रहे थे। जब उन्होंने राम को आते देखा, तो वे दौड़कर उनसे गले मिले। उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे।
वह अमावस की अँधेरी रात थी, इसलिए लोगों ने राम को रास्ता दिखाने के लिए हज़ारों दीये जलाए। पूरी नगरी तारों की तरह जगमगा उठी।
राम का अयोध्या के राजा के रूप में राजतिलक हुआ। सीता उनके पास बैठीं, और हनुमान उनके चरणों में बैठे।
राम ने प्यार और दया से राज किया, और सब लोग खुश रहे। इसीलिए हम हर साल दिवाली पर दीये जलाते हैं।
कहानी की शिक्षाप्यार और रोशनी सबको घर ले आते हैं।
आओ बात करें: जब तुम्हारा कोई प्यारा घर लौटता है, तो तुम उसका स्वागत कैसे करते हो?



